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पत्रकारिता विश्वविद्यालय में नियुक्तियों पर बवाल: डॉ. मोनिका वर्मा पर योग्यता और भेदभाव के आरोप

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हाइलाइट्स (Bullet Points)

•             माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय (एमसीयू) में शिक्षकों की नियुक्ति पर उठे सवाल

•             इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विभाग की प्रमुख डॉ. मोनिका वर्मा पर जातीय और क्षेत्रीय भेदभाव का आरोप

•             डॉ. अभिषेक यादव का दावा – बाहरी राज्यों से अयोग्य शिक्षकों को मिल रही प्राथमिकता

•             शैक्षणिक उपलब्धियों पर उठे सवाल – हाईस्कूल से लेकर पीजी तक अंक सीमारेखा पर

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•             पीएचडी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विषय में नहीं, फिर भी विभागाध्यक्ष का दायित्व

•             हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने माना अयोग्य, एमसीयू ने प्रोफेसर पद पर किया योग्य

•             चयन प्रक्रिया और आरक्षण नियमों में हेरफेर का आरोप

•             विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष – “नियुक्तियां पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के अनुसार”

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली।

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माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (एमसीयू) में नियुक्तियों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विभाग की प्रमुख डॉ. मोनिका वर्मा पर अतिथि प्राध्यापक डॉ. अभिषेक यादव ने गंभीर आरोप लगाए हैं। डॉ. यादव का कहना है कि विभाग में न केवल नियमों की अनदेखी हो रही है, बल्कि वर्ग विशेष और अन्य राज्यों से आए अतिथियों को प्राथमिकता देकर मध्यप्रदेश के स्थानीय एवं योग्य शिक्षकों के साथ भेदभाव किया जा रहा है।

डॉ. मोनिका वर्मा की योग्यता पर उठे सवाल

डॉ. अभिषेक यादव ने आरोप लगाया कि डॉ. मोनिका वर्मा की शैक्षणिक योग्यता और अनुभव इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विभाग से प्रत्यक्ष तौर पर मेल नहीं खाते। उनके अनुसार –

•             हाईस्कूल में 53.57%,

•             हायर सेकेंडरी में 49.5%,

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•             स्नातक में 50.41%,

•             और स्नातकोत्तर (पीजी) में 60% अंक हैं।

डॉ. यादव का कहना है कि डॉ. मोनिका ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विषय में न पीएचडी की है और न ही उनके पास इस क्षेत्र का पर्याप्त अनुभव है। इसके बावजूद उन्हें शिक्षक भर्ती और विभागाध्यक्ष पद का दायित्व लगातार मिल रहा है।

हिमाचल प्रदेश में अयोग्य, मध्यप्रदेश में प्रोफेसर कैसे?

डॉ. यादव ने सवाल उठाया कि जब हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने डॉ. मोनिका वर्मा को एसोसिएट प्रोफेसर पद पर अयोग्य घोषित किया, तो मध्यप्रदेश में एमसीयू ने उन्हें प्रोफेसर पद के लिए किस आधार पर योग्य मान लिया? आरोप है कि चयन प्रक्रिया में हेरफेर कर उन्हें लाभ पहुँचाया गया।

‘बाहरी राज्यों को प्राथमिकता’

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डॉ. यादव का आरोप है कि डॉ. मोनिका ने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और उत्तरप्रदेश से आए शिक्षकों को वरीयता दी जबकि मध्यप्रदेश निवासी और योग्य उम्मीदवारों को दरकिनार किया गया। स्वयं ओबीसी वर्ग से आने वाले डॉ. यादव का कहना है कि उन्हें पर्याप्त कक्षाएं नहीं दी जा रही हैं, जबकि बाहरी राज्यों से आने वाले शिक्षक, चाहे योग्य हों या न हों, प्राथमिकता पा रहे हैं।

आरक्षण नियमों की अनदेखी

आरोपों के मुताबिक, अतिथि प्राध्यापकों की चयन प्रक्रिया में आरक्षण नीति की साफ़ अनदेखी की गई। कई नामों को प्राथमिकता सूची में ऊपर-नीचे करके लाभ पहुँचाया गया, जिससे स्थानीय और आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार वंचित रह गए।

विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष

इस मामले पर विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि सभी नियुक्तियां विश्वविद्यालय की स्थापित प्रक्रिया और निर्धारित मानकों के अनुसार की जाती हैं। किसी भी प्रकार का पक्षपात या भेदभाव नहीं किया जा रहा है।

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प्रशासन का कहना है कि –

•             योग्यता और अनुभव के आधार पर ही उम्मीदवारों का चयन होता है।

•             किसी राज्य विशेष, जाति या वर्ग के आधार पर भेदभाव का आरोप तथ्यों से परे है।

•             यदि किसी शिक्षक या उम्मीदवार को चयन प्रक्रिया पर आपत्ति है, तो उसे लिखित में ज्ञापन देकर शिकायत करनी चाहिए, ताकि उच्च स्तरीय जांच कराई जा सके।

👉 इस प्रकार, एक ओर जहां आरोप पक्षपात और हेरफेर के हैं, वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन खुद पर लगे सभी आरोपों को निराधार बताते हुए नियमों के अनुसार चयन का दावा कर रहा है। अब देखना होगा कि इस पूरे विवाद पर उच्च शिक्षा विभाग या सरकार किस तरह की जांच और कार्रवाई करती है।

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मेडिकल एजुकेशन में बड़ा बदलाव, बंद होंगे PG डिप्लोमा कोर्स!

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Major overhaul in medical education: PG diploma courses to be discontinued!

भारत में मेडिकल की पढ़ाई को लेकर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। अब देश के मेडिकल कॉलेजों में चलने वाले पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कोर्सेस को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य मेडिकल शिक्षा की क्वालिटी को सुधारना और डॉक्टरों की विशेषज्ञता का स्तर ऊंचा करना है।

 क्यों लिया गया यह फैसला?

1. क्वालिटी में सुधार- पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन बोर्ड के अनुसार, स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की पढ़ाई के मानकों को बेहतर बनाए रखने के लिए यह निर्णय लिया गया है।

2. संसाधनों का सही इस्तेमाल- कई मेडिकल कॉलेजों के पास पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर और संसाधन मौजूद हैं, फिर भी वे सिर्फ डिप्लोमा कोर्स करवा रहे हैं। अब इन संसाधनों का उपयोग डिग्री कोर्सेस के लिए किया जाएगा।

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3. सीटों का फायदा- एक ही स्पेशलिटी में डिप्लोमा और MD/MS दोनों कोर्स चलने की परेशानी खत्म होगी, जिससे  PG सीटों की क्षमता का पूरा लाभ मिलेगा।

MD और MS डिग्री में बदलेंगे सभी कोर्स

NMC ने साफ कहा है कि, अब सभी तरह के पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कोर्सेस को खत्म करके उन्हें ‘पीजी ब्रॉड स्पेशलिटी’ डिग्री कोर्स यानी MD और MS में बदल दिया जाएगा।

‘पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशंस (PGMER) 2023’ के नियमों के तहत मेडिकल कॉलेज अपनी डिप्लोमा सीटों को डिग्री सीटों में बदलने के लिए ‘मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड’ (MARB) को आवेदन भेज सकते हैं।

वर्तमान छात्रों पर क्या पड़ेगा असर?

 जिन छात्रों ने मौजूदा शैक्षणिक सत्र में पीजी डिप्लोमा कोर्सेस में एडमिशन ले लिया है, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। उनकी पढ़ाई सामान्य रूप से पूरी कराई जाएगी और उन्हें डिप्लोमा की मान्यता भी मिलेगी।

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 कब से लागू होगा नया नियम?

. सोमवार, 22 जून 2026 को NMC ने इस संबंध में देशभर के मेडिकल कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज के साथ बातचीत की है।

कॉलेज प्रशासन को 19 जून को जारी नोटिस के नियमों को जल्द से जल्द लागू करने को कहा गया है।

. अगले सेशन यानी 2027-28 से पीजी डिप्लोमा कोर्सेस में कोई नया एडमिशन नहीं लिया जाएगा। इसकी जगह केवल NEET-PG के जरिए MD और MS डिग्री कोर्सेस में ही दाखिले होंगे।

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जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने जारी किया पीएचडी एडमिशन शेड्यूल,जानिए कब सेशुरू होंगे आवेदन

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जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए पीएचडी एडमिशन का शेड्यूल जारी किया है, जिसमें आवेदन आज 11 मई 2026 से शुरू हो रहे हैं।

महत्वपूर्ण तिथियां

  • ऑनलाइन आवेदन शुरू: 11 मई 2026 से।
  • आवेदन की अंतिम तिथि: 8 जून 2026।
  • फॉर्म सुधार विंडो: 9-10 जून 2026।
  • एडमिट कार्ड जारी: 14 जून 2026।
  • प्रवेश परीक्षा: 20-21 जून 2026।

आवेदन प्रक्रिया

आवेदन केवल ऑनलाइन मोड से admission.jmi.ac.in पर करें। पोर्टल पर Ph.D. Admissions 2026-27 सेक्शन में रजिस्टर करें, फॉर्म भरें, दस्तावेज अपलोड करें और शुल्क जमा करें।

योग्यता और शुल्क

मास्टर डिग्री धारक पात्र हैं (विस्तृत मानदंड नोटिफिकेशन में देखें)। आवेदन शुल्क लगभग ₹2000 है, जो पिछले सत्रों के आधार पर अपेक्षित है।

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ब्रेकिंग न्यूज़

मीडिया गुरु प्रो (डॉ.) केजी सुरेश पर शोध, राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने अंकित पांडेय को प्रदान की पीएचडी उपाधि

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भोपाल ।]

मीडिया एवं जनसंचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि के तहत डॉ. अंकित पांडेय को विद्या वाचस्पति (पीएचडी) की उपाधि प्रदान की गई। यह उपाधि मध्य प्रदेश के माननीय राज्यपाल मंगूभाई पटेल द्वारा एक गरिमामय समारोह में प्रदान की गई। यह शोध देश के प्रतिष्ठित मीडिया शिक्षाविद् प्रो. (डॉ.) केजी सुरेश के व्यक्तित्व और कृतित्व पर आधारित है, जिसमें उनके तीन दशकों से अधिक के बहुआयामी योगदान का गहन विश्लेषण किया गया है।

इस अवसर पर अभिनेता एवं सांसद रवि किशन तथा राज्यसभा सांसद एवं भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला सहित अनेक गणमान्य व्यक्तित्व उपस्थित रहे।

डॉ. अंकित पांडेय द्वारा किए गए शोध में प्रो. केजी सुरेश के पत्रकारिता, मीडिया शिक्षा, अंतरराष्ट्रीय संवाद और संस्थागत नेतृत्व के विभिन्न आयामों को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है। शोध में उल्लेख किया गया है कि प्रो. सुरेश ने भारत के साथ-साथ पाकिस्तान, अफगानिस्तान, नेपाल और चीन जैसे देशों में सक्रिय संवाददाता के रूप में कार्य करते हुए जमीनी पत्रकारिता को नई दिशा दी। उनकी रिपोर्टिंग केवल समाचार तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसने सामाजिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य को समझने का एक व्यापक दृष्टिकोण भी प्रदान किया।

प्रो. सुरेश ने दूरदर्शन में सलाहकार संपादक के रूप में कार्य करते हुए प्रसारण पत्रकारिता को सुदृढ़ किया। इसके अतिरिक्त, भारतीय जनसंचार संस्थान के महानिदेशक के रूप में उन्होंने संस्थान को ‘डीम्ड विश्वविद्यालय’ का दर्जा दिलाने की दिशा में पहल की और भाषाई पत्रकारिता को बढ़ावा दिया।

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलगुरु के रूप में उन्होंने भोपाल और रीवा में नए परिसरों की स्थापना की तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति को प्रभावी रूप से लागू किया। उन्होंने नई पीढ़ी को मूल्य-आधारित पत्रकारिता की दिशा में निरंतर मार्गदर्शन प्रदान किया।

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डॉ. अंकित पांडेय ने अपने शोध को केवल एक शैक्षणिक उपलब्धि न मानते हुए इसे गुरु–शिष्य परंपरा का जीवंत उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि यह शोध उनके लिए अपने गुरु के प्रति सम्मान, श्रद्धा और समर्पण की अभिव्यक्ति है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रो. केजी सुरेश के विचार, कार्यशैली और नैतिक मूल्यों को समझना उनके लिए एक सतत सीखने की प्रक्रिया रही है, जिसे उन्होंने अपने शोध के माध्यम से अभिव्यक्त करने का प्रयास किया है।

समारोह के दौरान डॉ. पांडेय ने कहा कि माननीय राज्यपाल मंगूभाई पटेल, रवि किशन, राजीव शुक्ला तथा मध्य प्रदेश की राज्य मंत्री कृष्णा गौर जैसे प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों के हाथों यह उपाधि प्राप्त करना उनके लिए आशीर्वाद और प्रेरणा का स्रोत है।

यह उपलब्धि न केवल डॉ. अंकित पांडेय के व्यक्तिगत परिश्रम और समर्पण का परिणाम है, बल्कि मीडिया शिक्षा और शोध के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान के रूप में भी स्थापित हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के शोध कार्य आने वाले समय में पत्रकारिता के विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होंगे तथा गुरु–शिष्य परंपरा को और सुदृढ़ करेंगे।

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