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छात्रों के लिए सुनहरा मौका! भारत में कैंपस ओपन करना चाहती हैं फिनलैंड की यूनिवर्सिटीज
भारत और फिनलैंड की यूनिवर्सिटीज के बीच हाल के समझौतों और भारत की नई शिक्षा नीति के कारण आने वाले सालों में भारत में विदेशी कैंपस तेजी से बढ़ रहे हैं, जिनमें यूरोपीय देशों (जैसे यूके, ऑस्ट्रेलिया) की यूनिवर्सिटीज आगे हैं और फिनलैंड की यूनिवर्सिटीज भी इसी ट्रेंड में भारत में उपस्थिति बढ़ाने को लेकर उत्सुक हैं। यह भारतीय छात्रों के लिए घर बैठे अंतरराष्ट्रीय स्तर की डिग्री और रिसर्च एक्सपोजर पाने का अच्छा मौका बन रहा है।
क्या हो रहा है अभी
- भारत सरकार और UGC ने ऐसी नीतियां बनाई हैं जिनसे चुनिंदा टॉप विदेशी यूनिवर्सिटीज को भारत में फिजिकल कैंपस खोलने की अनुमति मिल रही है, ताकि वे यहां की डिग्री सीधे ऑफर कर सकें।
- 2025 तक कई यूके और अन्य देशों की यूनिवर्सिटीज को भारत में कैंपस खोलने के लिए Letter of Intent या औपचारिक मंजूरी दी जा चुकी है, और 2026–27 के आसपास इनके बैच शुरू होने की योजना है।
छात्रों के लिए मुख्य फायदे
- कम लागत: वही या मिलती‑जुलती विदेशी डिग्री भारतीय शहरों में, आम तौर पर विदेश जाने की तुलना में काफी कम कुल खर्च (फीस + रहने का खर्च) में मिल सकती है।
- ग्लोबल एक्सपोजर: इंटरनेशनल फैकल्टी, करिकुलम और रिसर्च प्रोजेक्ट्स के जरिए छात्रों को ग्लोबल जॉब मार्केट के हिसाब से स्किल्स मिलेंगी, और आगे मास्टर्स/पीएचडी के लिए ट्रांज़िशन आसान होगा।
फिनलैंड यूनिवर्सिटीज की संभावनाएं
- नई शिक्षा नीति और विदेशी कैंपस के लिए बने फ्रेमवर्क के कारण नॉर्डिक देशों की यूनिवर्सिटीज (जिनमें फिनलैंड भी शामिल है) के लिए भी भारत में ऑफशोर या जॉइंट कैंपस खोलने की राह खुली हुई है, खासकर STEM, शिक्षा, सस्टेनेबिलिटी और आईसीटी जैसे क्षेत्रों में।
- अभी मुख्य औपचारिक घोषणाएं यूके और कुछ अन्य देशों की यूनिवर्सिटीज के लिए दिख रही हैं, इसलिए फिनिश यूनिवर्सिटीज के बारे में ताज़ा जानकारी के लिए सीधे उनकी आधिकारिक साइटें, इंडिया ऑफिस/एजुकेशन फेयर और भारतीय दूतावास/एजुकेशन फिनलैंड के अपडेट नियमित रूप से चेक करना फायदे का सौदा रहेगा।
आप क्या कर सकते हैं अभी
- 11th–12th या ग्रेजुएशन के स्तर पर हों तो उन इंडियन शहरों (दिल्ली‑NCR, बेंगलुरु, मुंबई आदि) पर नजर रखें जहां विदेशी कैंपस घोषित या प्लान हो रहे हैं, और उनकी एलिजिबिलिटी, फीस व स्कॉलरशिप डिटेल्स समय‑समय पर देखें।
- अगर खास तौर पर फिनलैंड टार्गेट है तो:
- फिनिश यूनिवर्सिटीज की वेबसाइट पर “India campus”, “offshore campus” या “joint programme in India” जैसे सेक्शन देखें।
- एरास्मस+/एक्सचेंज या ट्विनिंग प्रोग्राम ढूंढें, जिनमें पहले कुछ सेमेस्टर भारत और बाकी फिनलैंड में हो सकते हैं।
एडमिशन
मेडिकल एजुकेशन में बड़ा बदलाव, बंद होंगे PG डिप्लोमा कोर्स!
भारत में मेडिकल की पढ़ाई को लेकर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। अब देश के मेडिकल कॉलेजों में चलने वाले पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कोर्सेस को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य मेडिकल शिक्षा की क्वालिटी को सुधारना और डॉक्टरों की विशेषज्ञता का स्तर ऊंचा करना है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
1. क्वालिटी में सुधार- पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन बोर्ड के अनुसार, स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की पढ़ाई के मानकों को बेहतर बनाए रखने के लिए यह निर्णय लिया गया है।
2. संसाधनों का सही इस्तेमाल- कई मेडिकल कॉलेजों के पास पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर और संसाधन मौजूद हैं, फिर भी वे सिर्फ डिप्लोमा कोर्स करवा रहे हैं। अब इन संसाधनों का उपयोग डिग्री कोर्सेस के लिए किया जाएगा।
3. सीटों का फायदा- एक ही स्पेशलिटी में डिप्लोमा और MD/MS दोनों कोर्स चलने की परेशानी खत्म होगी, जिससे PG सीटों की क्षमता का पूरा लाभ मिलेगा।
MD और MS डिग्री में बदलेंगे सभी कोर्स
NMC ने साफ कहा है कि, अब सभी तरह के पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कोर्सेस को खत्म करके उन्हें ‘पीजी ब्रॉड स्पेशलिटी’ डिग्री कोर्स यानी MD और MS में बदल दिया जाएगा।
‘पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशंस (PGMER) 2023’ के नियमों के तहत मेडिकल कॉलेज अपनी डिप्लोमा सीटों को डिग्री सीटों में बदलने के लिए ‘मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड’ (MARB) को आवेदन भेज सकते हैं।
वर्तमान छात्रों पर क्या पड़ेगा असर?
जिन छात्रों ने मौजूदा शैक्षणिक सत्र में पीजी डिप्लोमा कोर्सेस में एडमिशन ले लिया है, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। उनकी पढ़ाई सामान्य रूप से पूरी कराई जाएगी और उन्हें डिप्लोमा की मान्यता भी मिलेगी।
कब से लागू होगा नया नियम?
. सोमवार, 22 जून 2026 को NMC ने इस संबंध में देशभर के मेडिकल कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज के साथ बातचीत की है।
. कॉलेज प्रशासन को 19 जून को जारी नोटिस के नियमों को जल्द से जल्द लागू करने को कहा गया है।
. अगले सेशन यानी 2027-28 से पीजी डिप्लोमा कोर्सेस में कोई नया एडमिशन नहीं लिया जाएगा। इसकी जगह केवल NEET-PG के जरिए MD और MS डिग्री कोर्सेस में ही दाखिले होंगे।
एडमिशन
जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने जारी किया पीएचडी एडमिशन शेड्यूल,जानिए कब सेशुरू होंगे आवेदन
जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए पीएचडी एडमिशन का शेड्यूल जारी किया है, जिसमें आवेदन आज 11 मई 2026 से शुरू हो रहे हैं।
महत्वपूर्ण तिथियां
- ऑनलाइन आवेदन शुरू: 11 मई 2026 से।
- आवेदन की अंतिम तिथि: 8 जून 2026।
- फॉर्म सुधार विंडो: 9-10 जून 2026।
- एडमिट कार्ड जारी: 14 जून 2026।
- प्रवेश परीक्षा: 20-21 जून 2026।
आवेदन प्रक्रिया
आवेदन केवल ऑनलाइन मोड से admission.jmi.ac.in पर करें। पोर्टल पर Ph.D. Admissions 2026-27 सेक्शन में रजिस्टर करें, फॉर्म भरें, दस्तावेज अपलोड करें और शुल्क जमा करें।
योग्यता और शुल्क
मास्टर डिग्री धारक पात्र हैं (विस्तृत मानदंड नोटिफिकेशन में देखें)। आवेदन शुल्क लगभग ₹2000 है, जो पिछले सत्रों के आधार पर अपेक्षित है।
ब्रेकिंग न्यूज़
मीडिया गुरु प्रो (डॉ.) केजी सुरेश पर शोध, राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने अंकित पांडेय को प्रदान की पीएचडी उपाधि
भोपाल ।]
मीडिया एवं जनसंचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि के तहत डॉ. अंकित पांडेय को विद्या वाचस्पति (पीएचडी) की उपाधि प्रदान की गई। यह उपाधि मध्य प्रदेश के माननीय राज्यपाल मंगूभाई पटेल द्वारा एक गरिमामय समारोह में प्रदान की गई। यह शोध देश के प्रतिष्ठित मीडिया शिक्षाविद् प्रो. (डॉ.) केजी सुरेश के व्यक्तित्व और कृतित्व पर आधारित है, जिसमें उनके तीन दशकों से अधिक के बहुआयामी योगदान का गहन विश्लेषण किया गया है।
इस अवसर पर अभिनेता एवं सांसद रवि किशन तथा राज्यसभा सांसद एवं भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला सहित अनेक गणमान्य व्यक्तित्व उपस्थित रहे।

डॉ. अंकित पांडेय द्वारा किए गए शोध में प्रो. केजी सुरेश के पत्रकारिता, मीडिया शिक्षा, अंतरराष्ट्रीय संवाद और संस्थागत नेतृत्व के विभिन्न आयामों को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है। शोध में उल्लेख किया गया है कि प्रो. सुरेश ने भारत के साथ-साथ पाकिस्तान, अफगानिस्तान, नेपाल और चीन जैसे देशों में सक्रिय संवाददाता के रूप में कार्य करते हुए जमीनी पत्रकारिता को नई दिशा दी। उनकी रिपोर्टिंग केवल समाचार तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसने सामाजिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य को समझने का एक व्यापक दृष्टिकोण भी प्रदान किया।
प्रो. सुरेश ने दूरदर्शन में सलाहकार संपादक के रूप में कार्य करते हुए प्रसारण पत्रकारिता को सुदृढ़ किया। इसके अतिरिक्त, भारतीय जनसंचार संस्थान के महानिदेशक के रूप में उन्होंने संस्थान को ‘डीम्ड विश्वविद्यालय’ का दर्जा दिलाने की दिशा में पहल की और भाषाई पत्रकारिता को बढ़ावा दिया।
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलगुरु के रूप में उन्होंने भोपाल और रीवा में नए परिसरों की स्थापना की तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति को प्रभावी रूप से लागू किया। उन्होंने नई पीढ़ी को मूल्य-आधारित पत्रकारिता की दिशा में निरंतर मार्गदर्शन प्रदान किया।

डॉ. अंकित पांडेय ने अपने शोध को केवल एक शैक्षणिक उपलब्धि न मानते हुए इसे गुरु–शिष्य परंपरा का जीवंत उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि यह शोध उनके लिए अपने गुरु के प्रति सम्मान, श्रद्धा और समर्पण की अभिव्यक्ति है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रो. केजी सुरेश के विचार, कार्यशैली और नैतिक मूल्यों को समझना उनके लिए एक सतत सीखने की प्रक्रिया रही है, जिसे उन्होंने अपने शोध के माध्यम से अभिव्यक्त करने का प्रयास किया है।
समारोह के दौरान डॉ. पांडेय ने कहा कि माननीय राज्यपाल मंगूभाई पटेल, रवि किशन, राजीव शुक्ला तथा मध्य प्रदेश की राज्य मंत्री कृष्णा गौर जैसे प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों के हाथों यह उपाधि प्राप्त करना उनके लिए आशीर्वाद और प्रेरणा का स्रोत है।
यह उपलब्धि न केवल डॉ. अंकित पांडेय के व्यक्तिगत परिश्रम और समर्पण का परिणाम है, बल्कि मीडिया शिक्षा और शोध के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान के रूप में भी स्थापित हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के शोध कार्य आने वाले समय में पत्रकारिता के विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होंगे तथा गुरु–शिष्य परंपरा को और सुदृढ़ करेंगे।
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