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ऑस्ट्रेलिया में नौकरी दिलाने के नाम पर कई लोग बने फ्रॉड का शिकार, जानें कैसे बचें ऐसे फ्रॉड से

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ऑस्ट्रेलिया में नौकरी दिलाने के नाम पर कई लोगों को फ्रॉड का शिकार बनाया जा रहा है, जिसमें उन्हें आकर्षक जॉब ऑफर और जल्दी वीजा का लालच देकर टॉर्चर या ठगी की जाती है। ऐसे फ्रॉड से बचने के लिए सतर्क रहना बेहद जरूरी है.

ऑस्ट्रेलिया में जॉब फ्रॉड के आम तरीके

  • फर्जी जॉब ऑफर: scammers ईमेल, व्हाट्सऐप, सोशल मीडिया या वेबसाइट के माध्यम से उच्च सैलरी वाली नौकरी का ऑफर देते हैं और वीजा प्रोसेसिंग या अन्य शुल्क अग्रिम रूप से मांगते हैं.
  • फर्जी एजेंट या रिक्रूटर्स: कुछ लोग खुद को अधिकृत एजेंट बताकर पैसे वसूलते हैं, लेकिन वे वास्तव में पंजीकृत नहीं होते.
  • झूठे वादे: ‘गारंटीड जॉब’, ‘फास्ट वीजा’, ‘स्थायी निवास’ जैसी बातें कही जाती हैं, जबकि यह सब असंभव या गैरकानूनी है.
  • फर्जी वेबसाइट या दस्तावेज़: कई मामलों में नकली कंपनी वेबसाइट और स्पेलिंग में छोटी-छोटी गलतियां होती हैं; भर्ती ईमेल किसी व्यक्तिगत Gmail/Yahoo से आती है.

जॉब फ्रॉड पहचानने के संकेत

  • अचानक या अप्रत्याशित मैसेज/ईमेल, जिसमें जॉब का लालच और त्वरित प्रक्रिया की बात हो.
  • एजेंट या कंपनी सीधे पैसे या गिफ्ट कार्ड मांगती है.
  • नाम, लोगो या जॉब रोल में मिली-जुली गलतियां, या ऑफिशियल वेबसाइट/ऑफिशियल मेल आईडी नहीं है.
  • कोई वर्क एग्रीमेंट या कानूनी दस्तावेज़ नहीं दिया जाता.
  • वेतन या बेनीफिट्स बहुत अधिक दर्ज किया गया है, जो बाजार रेट से काफी ज्यादा है.

ऐसे फ्रॉड से बचने के उपाय

  • हमेशा कंपनी या एजेंट के पंजीकरण और ऑथेंटिकेशन की जांच करें (ऑस्ट्रेलियन गवर्नमेंट की वेबसाइट पर).
  • ऑफर या ईमेल में दी गई जानकारी को कंपनी की ऑफिशियल वेबसाइट और प्रोफेशनल नेटवर्क (LinkedIn आदि) पर मिलाएं.
  • किसी भी भर्ती/वीज़ा प्रोसेस के लिए एजेंट या कंपनी को सीधे पैसे न भेजें; ऑस्ट्रेलिया के अधिकृत चैनल से ही पेमेंट करें.
  • जॉब वेबसाइट, सोशल मीडिया या मैसेजिंग ऐप पर आए जॉब ऑफर को सावधानीपूर्वक जांचें, और शक हो तो तुरंत प्रोफेशनल काउंसिल या दूतावास की सलाह लें.
  • निजी जानकारी (पासपोर्ट, बैंक डिटेल, पहचान पत्र) बिना जांचे किसी को न दें.

अगर आप जॉब फ्रॉड के शिकार हो गए

  • तुरंत पुलिस या ऑस्ट्रेलियाई गवर्नमेंट के एंटी-स्कैम सेंटर (ScamWatch/NASC) को रिपोर्ट करें.
  • अपने बैंक और पहचान संबंधित दस्तावेजों को ब्लॉक या रीसेट करें.
  • भविष्य में ऐसी किसी स्कीम से सावधान रहें और अपने अनुभव दूसरों से साझा करें.

ऑस्ट्रेलिया में नौकरी का ऑफर मिलने पर तुरंत आकर्षक वादों और पैसे मांगने वाले एजेंट/कंपनी से बचें, और हमेशा ऑफिशियल चैनल व ऑथेंटिक गाइडलाइंस को ही फॉलो करें.

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एडमिशन

जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने जारी किया पीएचडी एडमिशन शेड्यूल,जानिए कब सेशुरू होंगे आवेदन

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जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए पीएचडी एडमिशन का शेड्यूल जारी किया है, जिसमें आवेदन आज 11 मई 2026 से शुरू हो रहे हैं।

महत्वपूर्ण तिथियां

  • ऑनलाइन आवेदन शुरू: 11 मई 2026 से।
  • आवेदन की अंतिम तिथि: 8 जून 2026।
  • फॉर्म सुधार विंडो: 9-10 जून 2026।
  • एडमिट कार्ड जारी: 14 जून 2026।
  • प्रवेश परीक्षा: 20-21 जून 2026।

आवेदन प्रक्रिया

आवेदन केवल ऑनलाइन मोड से admission.jmi.ac.in पर करें। पोर्टल पर Ph.D. Admissions 2026-27 सेक्शन में रजिस्टर करें, फॉर्म भरें, दस्तावेज अपलोड करें और शुल्क जमा करें।

योग्यता और शुल्क

मास्टर डिग्री धारक पात्र हैं (विस्तृत मानदंड नोटिफिकेशन में देखें)। आवेदन शुल्क लगभग ₹2000 है, जो पिछले सत्रों के आधार पर अपेक्षित है।

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मीडिया गुरु प्रो (डॉ.) केजी सुरेश पर शोध, राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने अंकित पांडेय को प्रदान की पीएचडी उपाधि

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भोपाल ।]

मीडिया एवं जनसंचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि के तहत डॉ. अंकित पांडेय को विद्या वाचस्पति (पीएचडी) की उपाधि प्रदान की गई। यह उपाधि मध्य प्रदेश के माननीय राज्यपाल मंगूभाई पटेल द्वारा एक गरिमामय समारोह में प्रदान की गई। यह शोध देश के प्रतिष्ठित मीडिया शिक्षाविद् प्रो. (डॉ.) केजी सुरेश के व्यक्तित्व और कृतित्व पर आधारित है, जिसमें उनके तीन दशकों से अधिक के बहुआयामी योगदान का गहन विश्लेषण किया गया है।

इस अवसर पर अभिनेता एवं सांसद रवि किशन तथा राज्यसभा सांसद एवं भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला सहित अनेक गणमान्य व्यक्तित्व उपस्थित रहे।

डॉ. अंकित पांडेय द्वारा किए गए शोध में प्रो. केजी सुरेश के पत्रकारिता, मीडिया शिक्षा, अंतरराष्ट्रीय संवाद और संस्थागत नेतृत्व के विभिन्न आयामों को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है। शोध में उल्लेख किया गया है कि प्रो. सुरेश ने भारत के साथ-साथ पाकिस्तान, अफगानिस्तान, नेपाल और चीन जैसे देशों में सक्रिय संवाददाता के रूप में कार्य करते हुए जमीनी पत्रकारिता को नई दिशा दी। उनकी रिपोर्टिंग केवल समाचार तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसने सामाजिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य को समझने का एक व्यापक दृष्टिकोण भी प्रदान किया।

प्रो. सुरेश ने दूरदर्शन में सलाहकार संपादक के रूप में कार्य करते हुए प्रसारण पत्रकारिता को सुदृढ़ किया। इसके अतिरिक्त, भारतीय जनसंचार संस्थान के महानिदेशक के रूप में उन्होंने संस्थान को ‘डीम्ड विश्वविद्यालय’ का दर्जा दिलाने की दिशा में पहल की और भाषाई पत्रकारिता को बढ़ावा दिया।

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलगुरु के रूप में उन्होंने भोपाल और रीवा में नए परिसरों की स्थापना की तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति को प्रभावी रूप से लागू किया। उन्होंने नई पीढ़ी को मूल्य-आधारित पत्रकारिता की दिशा में निरंतर मार्गदर्शन प्रदान किया।

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डॉ. अंकित पांडेय ने अपने शोध को केवल एक शैक्षणिक उपलब्धि न मानते हुए इसे गुरु–शिष्य परंपरा का जीवंत उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि यह शोध उनके लिए अपने गुरु के प्रति सम्मान, श्रद्धा और समर्पण की अभिव्यक्ति है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रो. केजी सुरेश के विचार, कार्यशैली और नैतिक मूल्यों को समझना उनके लिए एक सतत सीखने की प्रक्रिया रही है, जिसे उन्होंने अपने शोध के माध्यम से अभिव्यक्त करने का प्रयास किया है।

समारोह के दौरान डॉ. पांडेय ने कहा कि माननीय राज्यपाल मंगूभाई पटेल, रवि किशन, राजीव शुक्ला तथा मध्य प्रदेश की राज्य मंत्री कृष्णा गौर जैसे प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों के हाथों यह उपाधि प्राप्त करना उनके लिए आशीर्वाद और प्रेरणा का स्रोत है।

यह उपलब्धि न केवल डॉ. अंकित पांडेय के व्यक्तिगत परिश्रम और समर्पण का परिणाम है, बल्कि मीडिया शिक्षा और शोध के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान के रूप में भी स्थापित हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के शोध कार्य आने वाले समय में पत्रकारिता के विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होंगे तथा गुरु–शिष्य परंपरा को और सुदृढ़ करेंगे।

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उत्तर प्रदेश -झारखंड में भीषण गर्मी का कहर, स्कूलों की टाइमिंग बदली

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उत्तर प्रदेश और झारखंड में भीषण गर्मी और हीटवेव के चलते राज्य सरकारों ने शीतकालीन/सामान्य टाइमिंग के बजाय स्कूलों की समय‑सारणी बदल दी है, ताकि बच्चे दोपहर की झुलसाती धूप और लू से बच सकें।


उत्तर प्रदेश में क्या आदेश है

  • कई जिलों में स्कूलों की दोपहर की गर्मी से बचाने के लिए समय को सुबह की ओर शिफ्ट किया गया है, जैसे कक्षाएँ अब सुबह जल्दी शुरू और दोपहर से पहले खत्म करवाने के निर्देश।
  • जहाँ तापमान अत्यधिक रहता है, वहाँ स्कूल दिनचर्या छोटी और हल्की रखने, लंबे ब्रेक और छत्र/पंखे/पानी की व्यवस्था को बेहतर करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

झारखंड में नई स्कूल टाइमिंग

  • झारखंड सरकार के निर्देश पर रांची और अन्य जिलों के सभी प्रकार के स्कूलों (सरकारी, गैर‑सरकारी, निजी सहित) की समय‑सारणी बदली गई है।
  • नई टाइमिंग का मुख्य ढांचा (लगभग):
    • KG से कक्षा 8 तक: सुबह 7:00 बजे से 11:30 बजे तक कक्षा।
    • कक्षा 9 से 12 तक: सुबह 7:00 बजे से 12:00 बजे तक कक्षा।

शिक्षकों और स्टाफ के लिए आदेश

  • झारखंड में सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को सुबह 7:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक स्कूल में उपस्थित रहकर गैर‑शैक्षणिक कार्य (बैठक, रिकॉर्ड, बोर्ड पर काम आदि) करने का निर्देश दिया गया है।
  • यह आदेश 21 अप्रैल 2026 से प्रभावी है और भीषण गर्मी से बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है।

अभिभावकों के लिए ज़रूरी बातें

  • अपने ज़िले/शहर के शिक्षा विभाग या विद्यालय वाट्स‑एप ग्रुप से स्थानीय ऑर्डर ज़रूर चेक करें, क्योंकि कुछ ज़िलों में अलग टाइमिंग या अस्थायी छुट्टी भी हो सकती है।
  • बच्चों को हल्के‑कपड़े, टोपी, पानी की बोतल और थोड़ा खाना ज़रूर दें, ताकि गर्मी और लू से कम से कम नुकसान हो।
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