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विश्वविद्यालय प्रोफाइल

मध्य प्रदेश सरकार ने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में देश की अलग-अलग भाषाएं पढ़ाने की नई योजना लागू की

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मध्य प्रदेश सरकार ने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में देश की अलग-अलग भाषाएं पढ़ाने की नई योजना लागू की है, जिससे अब छात्र भारतीय राज्यों की प्रमुख भाषाओं में शैक्षणिक कोर्स कर सकेंगे। यह पहल 2025-26 के नए शिक्षण सत्र में लागू की जा रही है.

योजना का उद्देश्य

इस योजना का मकसद विभिन्न राज्यों के निवासियों के बीच संवाद को आसान बनाना, भाषाई एकता को बढ़ावा देना और प्रदेश के युवाओं को पूरे भारत की भाषाओं में दक्ष बनाना है. उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि यह एकात्मता तथा देश को जोड़ने का भाव है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार शुरू किया गया है.

कौन-कौन सी भाषाएं सिखाई जाएंगी?

मध्य प्रदेश के 17 सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में कुल लगभग 22 भाषाओं के कोर्स शुरू किए जाएंगे, हर यूनिवर्सिटी में कम-से-कम एक या दो भाषाएं सिखाई जाएंगी. मुख्य भाषाओं में तमिल, तेलुगु, कन्नड़, उड़िया, मराठी, पंजाबी, उर्दू, अंग्रेज़ी, संस्कृत, गुजराती, बंगाली, असमिया, और हिंदी शामिल हैं.

क्रेडिट सिस्टम और कोर्स स्वरूप

  • इन भाषाओं को क्रेडिट सिस्टम से जोड़ा जाएगा, जिससे छात्र नियमित डिग्री के साथ भाषा में सर्टिफिकेट या डिप्लोमा ले पाएंगे.
  • कोर्स प्रमाणपत्र/डिप्लोमा स्तर पर होंगे या सामान्य पाठ्यक्रम में समाहित किए जाएंगे, जिससे छात्र अपनी रुचि या ज़रूरत अनुसार भाषा चुन सकें.

लागू होने की प्रक्रिया

  • सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपनी पसंद/आवंटित भाषा के लिए विस्तृत कार्ययोजना बनाएं और शिक्षकों की नियुक्ति एवं पाठ्यक्रम अपडेट करें.
  • अगले शैक्षणिक सत्र से व्यवस्था शुरू हो रही है, छात्रों को प्रवेश के समय भाषा के विकल्प मिलेंगे.

प्रमुख बिंदु

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत यह पहल देश में सबसे पहले एमपी सरकार ने इतनी व्यापक स्तर पर अपनाई है.
  • युवाओं को देश में कहीं भी जाकर संवाद और रोजगार के नए अवसर मिल सकेंगे
  • सांस्कृतिक विविधता और भाईचारे को बढ़ावा देने के साथ भाषाई विवादों को भी कम करने का प्रयास है.

निष्कर्ष

मध्य प्रदेश पूरे भारत की भाषाओं को कॉलेज स्तर पर पढ़ाने वाला पहला राज्य बन गया है, और इससे विद्यार्थियों को देश के हर कोने में संवाद तथा संस्कृति को समझने के बेहतरीन अवसर मिलेंगे.

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ब्रेकिंग न्यूज़

मीडिया गुरु प्रो (डॉ.) केजी सुरेश पर शोध, राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने अंकित पांडेय को प्रदान की पीएचडी उपाधि

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भोपाल ।]

मीडिया एवं जनसंचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि के तहत डॉ. अंकित पांडेय को विद्या वाचस्पति (पीएचडी) की उपाधि प्रदान की गई। यह उपाधि मध्य प्रदेश के माननीय राज्यपाल मंगूभाई पटेल द्वारा एक गरिमामय समारोह में प्रदान की गई। यह शोध देश के प्रतिष्ठित मीडिया शिक्षाविद् प्रो. (डॉ.) केजी सुरेश के व्यक्तित्व और कृतित्व पर आधारित है, जिसमें उनके तीन दशकों से अधिक के बहुआयामी योगदान का गहन विश्लेषण किया गया है।

इस अवसर पर अभिनेता एवं सांसद रवि किशन तथा राज्यसभा सांसद एवं भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला सहित अनेक गणमान्य व्यक्तित्व उपस्थित रहे।

डॉ. अंकित पांडेय द्वारा किए गए शोध में प्रो. केजी सुरेश के पत्रकारिता, मीडिया शिक्षा, अंतरराष्ट्रीय संवाद और संस्थागत नेतृत्व के विभिन्न आयामों को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है। शोध में उल्लेख किया गया है कि प्रो. सुरेश ने भारत के साथ-साथ पाकिस्तान, अफगानिस्तान, नेपाल और चीन जैसे देशों में सक्रिय संवाददाता के रूप में कार्य करते हुए जमीनी पत्रकारिता को नई दिशा दी। उनकी रिपोर्टिंग केवल समाचार तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसने सामाजिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य को समझने का एक व्यापक दृष्टिकोण भी प्रदान किया।

प्रो. सुरेश ने दूरदर्शन में सलाहकार संपादक के रूप में कार्य करते हुए प्रसारण पत्रकारिता को सुदृढ़ किया। इसके अतिरिक्त, भारतीय जनसंचार संस्थान के महानिदेशक के रूप में उन्होंने संस्थान को ‘डीम्ड विश्वविद्यालय’ का दर्जा दिलाने की दिशा में पहल की और भाषाई पत्रकारिता को बढ़ावा दिया।

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलगुरु के रूप में उन्होंने भोपाल और रीवा में नए परिसरों की स्थापना की तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति को प्रभावी रूप से लागू किया। उन्होंने नई पीढ़ी को मूल्य-आधारित पत्रकारिता की दिशा में निरंतर मार्गदर्शन प्रदान किया।

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डॉ. अंकित पांडेय ने अपने शोध को केवल एक शैक्षणिक उपलब्धि न मानते हुए इसे गुरु–शिष्य परंपरा का जीवंत उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि यह शोध उनके लिए अपने गुरु के प्रति सम्मान, श्रद्धा और समर्पण की अभिव्यक्ति है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रो. केजी सुरेश के विचार, कार्यशैली और नैतिक मूल्यों को समझना उनके लिए एक सतत सीखने की प्रक्रिया रही है, जिसे उन्होंने अपने शोध के माध्यम से अभिव्यक्त करने का प्रयास किया है।

समारोह के दौरान डॉ. पांडेय ने कहा कि माननीय राज्यपाल मंगूभाई पटेल, रवि किशन, राजीव शुक्ला तथा मध्य प्रदेश की राज्य मंत्री कृष्णा गौर जैसे प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों के हाथों यह उपाधि प्राप्त करना उनके लिए आशीर्वाद और प्रेरणा का स्रोत है।

यह उपलब्धि न केवल डॉ. अंकित पांडेय के व्यक्तिगत परिश्रम और समर्पण का परिणाम है, बल्कि मीडिया शिक्षा और शोध के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान के रूप में भी स्थापित हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के शोध कार्य आने वाले समय में पत्रकारिता के विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होंगे तथा गुरु–शिष्य परंपरा को और सुदृढ़ करेंगे।

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नीति और योजनाएं

 यूजीसी ने हाल ही में फर्जी विश्वविद्यालयों को लेकर सख्त चेतावनी जारी की, इस संस्थान में दाखिला न लें

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यूजीसी ने हाल ही में फर्जी विश्वविद्यालयों को लेकर सख्त चेतावनी जारी की है, खासकर राजस्थान के अलवर में राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी को फर्जी घोषित किया गया है। छात्रों और अभिभावकों से अपील की गई है कि दाखिला लेने से पहले संस्थान की मान्यता जरूर जांचें, क्योंकि इनसे मिली डिग्रियां नौकरी या आगे की पढ़ाई के लिए अमान्य होंगी।

फर्जी संस्थान की जानकारी

राजस्थान के अलवर स्थित यह संस्थान यूजीसी अधिनियम की धारा 2(f) और 3 के तहत मान्यता प्राप्त नहीं है। फरवरी 2026 में भी इस पर नोटिस जारी हो चुका था, और अब मार्च 2026 में दोबारा चेतावनी दी गई है।

अन्य फर्जी विश्वविद्यालय

देशभर में 32 से अधिक फर्जी विश्वविद्यालय चिह्नित किए गए हैं, जिनमें दिल्ली में सबसे ज्यादा (12), यूपी में 4, और महाराष्ट्र में नेशनल बैकवर्ड कृषि विद्यापीठ शामिल है। कर्नाटक, झारखंड और हरियाणा जैसे राज्यों में भी नए फर्जी संस्थान सामने आए हैं।

जांच कैसे करें

  • यूजीसी की आधिकारिक वेबसाइट (ugc.gov.in) पर फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची देखें।
  • दाखिला लेने से पहले संस्थान की मान्यता की पुष्टि करें, ताकि समय, पैसा और करियर बर्बाद न हो।
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एडमिशन

जामिया में 30 नए कोर्स शुरू और फीस में बड़ी राहत से छात्रों को फायदा

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जामिया मिल्लिया इस्लामिया (Jamia Millia Islamia, JMI) ने 2026‑27 के शैक्षणिक सत्र के लिए छात्रों के लिए एक बड़ा “सुनहरा मौका” दिया है, जिसमें 30 नए कोर्स/प्रोग्राम शुरू किए गए हैं और इसी के साथ फीस में बढ़ोतरी नहीं की गई है, यानी यह वाकई में छात्रों के लिए राहत वाला निर्णय माना जा रहा है।

30 नए कोर्स किस‑किस तरह के?

  • नए कोर्स अलग‑अलग लेवल (UG, PG, डिप्लोमा) और फील्ड में हैं, जैसे:
  • भाषा और ह्यूमन रिसोर्स: BA (Hons) जापानी, जर्मन, उज़्बेक भाषा और बीए (ऑनर्स) ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट (HRM) जैसे प्रोग्राम।
  • इंजीनियरिंग व टेक्नोलॉजी: बीटेक रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बीटेक सिविल (निर्माण प्रौद्योगिकी) और शहरों में सुविधा के लिए शाम की क्लासेज वाला बीई सिविल इंजीनियरिंग (ईवनिंग, सेल्फ‑फाइनेंस विकल्प)।
  • साइंस और सोशल स्टडीज: एमएससी बायोसाइंसेज, बायोटेक्नोलॉजी, बॉटनी, बायोफिजिक्स, एमए सोशल वर्क, एमए HRM, एमए सोशियोलॉजी आदि।

फीस में क्या राहत मिली?

  • विश्वविद्यालय ने घोषणा की है कि 2026‑27 सत्र के लिए किसी भी कोर्स की फीस में वृद्धि नहीं की गई है, यानी पिछले साल वाली फीस दरें ही लागू रहेंगी; यह चाहे वह नया कोर्स हो या पुराना।
  • यह तय फीस (स्केल) छात्रों के लिए योजना बनाने में आसानी करती है और उन्हें “महंगी फीस” के डर के बजाय नए और नए फील्ड में एडमिशन लेने में मदद करती है।

एडमिशन और आवेदन की तारीखें

  • जामिया ने 2026‑27 के लिए एडमिशन प्रक्रिया शुरू कर दी है और विश्वविद्यालय का ऑनलाइन एडमिशन पोर्टल admission.jmi.ac.in पर रजिस्ट्रेशन और फॉर्म भरना जारी है।​​
  • कई नए UG/PG/डिप्लोमा कोर्स के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 25 मार्च 2026 तय की गई है; देर न करते हुए जल्दी से अपनी योग्यता के अनुसार आवेदन किया जा सकता है।

खास बातें: NEP 2020 और मल्टीपल एंट्री

  • विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के अनुरूप चार वर्षीय अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम (FYUP) में मल्टीपल एंट्री‑एग्जिट मोड शुरू किया है, जिससे छात्र अलग‑अलग समय पर एंट्री ले सकते हैं।
  • नए कोर्स स्किल‑बेस्ड और इंडस्ट्री‑रिलेटेड (जैसे AI, डिजिटल मीडिया, डेटा साइंस, रोबोटिक्स, HRM, जापानी/जर्मन भाषा आदि) हैं, जिससे एडमिशन लेने वाले छात्रों के करियर के ऑप्शन बढ़ रहे हैं।​

अगर चाहें तो आप अपना क्या खत्म किया? (12th, ग्रेजुएशन) और किस फील्ड में दिलचस्पी है (Science/Arts/Commerce/Engineering/Management) लिख दें, तो बता सकता हूँ कि जामिया के 30 नए कोर्स में से आपके लिए कौन‑से 3–4 प्रोग्राम सबसे फिट रहेंगे और उनके लिए तैयारी कैसे करें।

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