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करियर गाइडेंस

आइए जानतें हैं, कैसे बनाएं 10वीं के बाद ISRO में करियर?

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10वीं के बाद ISRO में करियर कैसे बनाएं?

अगर आप 10वीं कक्षा के बाद ISRO (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) में करियर बनाने का सपना देख रहे हैं, तो इसके लिए एक स्पष्ट रोडमैप जरूरी है। नीचे दिए गए स्टेप्स और ज़रूरी योग्यता से आपको दिशा मिलेगी—

1. 10वीं के बाद सही विषय चुनना

  • 11वीं-12वीं में साइंस स्ट्रीम और PCM लें:
    10वीं के बाद आपको 11वीं और 12वीं में साइंस स्ट्रीम चुननी होगी, जिसमें मुख्य विषय फिजिक्स, कैमिस्ट्री और मैथमेटिक्स (PCM) होने चाहिए। यह ISRO की फसल्टियों के लिए पहली महत्वपूर्ण नींव है।

2. 12वीं के बाद उच्च शिक्षा

  • इंजीनियरिंग/साइंस डिग्री लें:
    आप 12वीं के बाद नीचे दिए गए कोर्सों में से कोई चुन सकते हैं—
    • B.Tech/BE (Aerospace, Mechanical, Electronics, Computer Science, Electrical)
    • B.Sc. (Physics, Mathematics), इसके बाद MSc
    • ISRO से जुड़े खास इंस्टिट्यूट्स जैसे IIST में दाखिला लेना फायदेमंद है, जहां से सीधा ISRO में चयन की संभावना ज्यादा होती है।
  • कोर्स में कंप्यूटर साइंस का चुनाव भी फायदेमंद रहता है, क्योंकि कई ISRO जॉब्स में प्रोग्रामिंग/AI/डाटा एनालिसिस की जरूरत होती है।

3. अकादमिक प्रदर्शन

  • 65% अंक या 6.84/10 CGPA होना अनिवार्य:
    ISRO में भर्ती के लिए आपकी ग्रेजुएशन डिग्री में न्यूनतम 65% अंक जरूरी होते हैं, और यह किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से होनी चाहिए।

4. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी

  • JEE Main/Advanced:
    IIST में दाखिले के लिए तैयारी करें।
  • ISRO Centralized Recruitment Board (ICRB) Exam:
    ISRO की जॉब्स के लिए ग्रेजुएशन के बाद यह मुख्य परीक्षा होती है।
  • GATE Exam:
    इसके अच्छे नंबर पर भी ISRO में सीधा इंट्री मिल सकती है।

5. इंटर्नशिप व प्रैक्टिकल अनुभव

  • ISRO या अन्य संबंधित संस्थानों में प्रोजेक्ट व इंटर्नशिप करें। इससे आपके सेलेक्शन की संभावना बढ़ती है।
  • स्कूल स्तर पर साइंस फेयर, ओलंपियाड, कोडिंग कॉम्पटीशन में भी भाग लें।

6. अन्य महत्वपूर्ण जानकारी

आवश्यकताविवरण
न्यूनतम योग्यताB.Tech/BE या B.Sc./M.Sc.
12वीं में विषयफिजिक्स, कैमिस्ट्री, गणित (PCM)
न्यूनतम अंक (ग्रेजुएशन)65% या 6.84/10 CGPA
प्रवेश परीक्षाएँJEE, IIST, ISRO ICRB, GATE
उम्र सीमा (साइंटिस्ट के लिए)18-30 वर्ष

7. सीधे 10वीं के बाद ISRO में एंट्री का विकल्प?

  • सीधे 10वीं के बाद ISRO में साइंटिस्ट/इंजीनियर की जॉब उपलब्ध नहीं है।
  • ISRO में डायरेक्ट ऐंट्री के लिए इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (ITI) या डिप्लोमा के जरिए तकनीकी पदों (टेक्नीशियन, टेक्निकल असिस्टेंट) पर आवेदन संभव है, परंतु वैज्ञानिक पदों के लिए स्नातक डिग्री जरूरी है।

8. मोटिवेशन और अपडेट्स

  • ISRO की वेबसाइट पर छात्रों के लिए STEM एक्टिविटी, क्विज, वर्कशॉप जैसी कई गतिविधियां भी आयोजित होती हैं, जिनसे स्कूली छात्र जुड़े रह सकते हैं।
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मेडिकल एजुकेशन में बड़ा बदलाव, बंद होंगे PG डिप्लोमा कोर्स!

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Major overhaul in medical education: PG diploma courses to be discontinued!

भारत में मेडिकल की पढ़ाई को लेकर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। अब देश के मेडिकल कॉलेजों में चलने वाले पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कोर्सेस को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य मेडिकल शिक्षा की क्वालिटी को सुधारना और डॉक्टरों की विशेषज्ञता का स्तर ऊंचा करना है।

 क्यों लिया गया यह फैसला?

1. क्वालिटी में सुधार- पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन बोर्ड के अनुसार, स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की पढ़ाई के मानकों को बेहतर बनाए रखने के लिए यह निर्णय लिया गया है।

2. संसाधनों का सही इस्तेमाल- कई मेडिकल कॉलेजों के पास पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर और संसाधन मौजूद हैं, फिर भी वे सिर्फ डिप्लोमा कोर्स करवा रहे हैं। अब इन संसाधनों का उपयोग डिग्री कोर्सेस के लिए किया जाएगा।

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3. सीटों का फायदा- एक ही स्पेशलिटी में डिप्लोमा और MD/MS दोनों कोर्स चलने की परेशानी खत्म होगी, जिससे  PG सीटों की क्षमता का पूरा लाभ मिलेगा।

MD और MS डिग्री में बदलेंगे सभी कोर्स

NMC ने साफ कहा है कि, अब सभी तरह के पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कोर्सेस को खत्म करके उन्हें ‘पीजी ब्रॉड स्पेशलिटी’ डिग्री कोर्स यानी MD और MS में बदल दिया जाएगा।

‘पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशंस (PGMER) 2023’ के नियमों के तहत मेडिकल कॉलेज अपनी डिप्लोमा सीटों को डिग्री सीटों में बदलने के लिए ‘मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड’ (MARB) को आवेदन भेज सकते हैं।

वर्तमान छात्रों पर क्या पड़ेगा असर?

 जिन छात्रों ने मौजूदा शैक्षणिक सत्र में पीजी डिप्लोमा कोर्सेस में एडमिशन ले लिया है, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। उनकी पढ़ाई सामान्य रूप से पूरी कराई जाएगी और उन्हें डिप्लोमा की मान्यता भी मिलेगी।

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 कब से लागू होगा नया नियम?

. सोमवार, 22 जून 2026 को NMC ने इस संबंध में देशभर के मेडिकल कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज के साथ बातचीत की है।

कॉलेज प्रशासन को 19 जून को जारी नोटिस के नियमों को जल्द से जल्द लागू करने को कहा गया है।

. अगले सेशन यानी 2027-28 से पीजी डिप्लोमा कोर्सेस में कोई नया एडमिशन नहीं लिया जाएगा। इसकी जगह केवल NEET-PG के जरिए MD और MS डिग्री कोर्सेस में ही दाखिले होंगे।

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युवाओं के लिए सुनहरा मौका; रेलवे में 11127 असिस्टेंट लोको पायलट पदों पर भर्ती जल्द​

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रेलवे में असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) के 11,127 पदों पर भर्ती एक बड़ा अवसर है, जो युवाओं के लिए सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका प्रदान करता है। यह भर्ती CEN No.01/2026 के तहत विभिन्न रेलवे जोनों में होगी।

महत्वपूर्ण तिथियां

ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 15 मई 2026 से शुरू हो चुकी है और 14 जून 2026 रात 12 बजे तक चलेगी। आवेदन केवल आधिकारिक वेबसाइट rrbapply.gov.in पर ही स्वीकार किए जाएंगे। प्रयागराज जैसे क्षेत्रों में भी 600+ पद उपलब्ध हैं।

रिक्तियों का ब्रेकअप

सबसे अधिक पद ईस्ट कोस्ट रेलवे (1625) में हैं, उसके बाद साउथ ईस्टर्न रेलवे (1531) और सेंट्रल रेलवे (1400)। कुल 11,127 पद देशभर के रेलवे जोनों में भरे जाएंगे।

पात्रता और वेतन

चयनित उम्मीदवारों को प्रारंभिक मूल वेतन 19,900 रुपये मिलेगा (लेवल-2)। विस्तृत पात्रता जैसे उम्र सीमा और शैक्षणिक योग्यता आधिकारिक नोटिफिकेशन में देखें। भर्ती प्रक्रिया में CBT, CBAT और दस्तावेज सत्यापन शामिल होंगे।

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क्या अब वर्क फ्रॉम होम से होगा सारा काम? पीएम मोदी ने की वर्क फ्रॉम होम की चर्चा

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पीएम मोदी ने वर्क फ्रॉम होम (WFH) को पूर्ण रूप से अनिवार्य नहीं किया, बल्कि मिडिल ईस्ट संकट के बीच ईंधन बचत के लिए कंपनियों से इसे दोबारा अपनाने की अपील की है। यह सलाह वैश्विक आर्थिक दबाव और पेट्रोल-डीजल की बचत पर केंद्रित है।

पीएम मोदी की अपील

10 मई 2026 को हैदराबाद जनसभा में पीएम ने कोविड काल के WFH मॉडल को याद करते हुए कहा कि जहां संभव हो, कंपनियां और कर्मचारी घर से काम करें, ऑनलाइन मीटिंग लें। इससे वाहनों का दबाव कम होगा और तेल आयात पर खर्च बचेगा।

मौजूदा नीतियां

नए लेबर कोड्स 2026 में WFH को IT, सर्विस सेक्टरों में कानूनी मान्यता मिली है, हाइब्रिड मॉडल को बढ़ावा। SEZ में 50% कर्मचारियों को 1 साल तक WFH की अनुमति। फैसला कंपनी-कर्मचारी सहमति पर निर्भर।

चर्चा के कारण

मिडिल ईस्ट तनाव से ईंधन महंगा होने पर अपील वायरल हो गई, लेकिन कोई नया बाध्यकारी नियम नहीं। पहले भी पीएम ने फ्लेक्सिबल वर्किंग को भविष्य बताया था।

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