करियर गाइडेंस
अमेरिका में टेक सेक्टर में जॉब पाने के लिए भारतीय छात्रा ने दिया ‘गुरु मंत्र’
अमेरिका में टेक सेक्टर में लगातार नौकरियों की कमी के बावजूद, भारतीय छात्रा प्रियंका देवी का अनुभव और उसके दिए टिप्स कई छात्रों के लिए मददगार साबित हो सकते हैं। उन्होंने अपने संघर्ष और सफलता की कहानी साझा करते हुए कुछ ऐसे ‘गुरु मंत्र’ बताए हैं, जिनसे अमेरिका में कंप्यूटर साइंस या इससे जुड़े फील्ड में नौकरी पाने की संभावना बढ़ सकती है।
प्रियंका देवी का सफर
- प्रियंका देवी ने अन्ना यूनिवर्सिटी, चेन्नई से कंप्यूटर साइंस में बीई किया।
- मास्टर्स के लिए वे अमेरिका के बिंगहैमटन यूनिवर्सिटी, न्यूयॉर्क गईं।
- उनके कोर्स में ज़्यादातर छात्रों के पास 3-4 साल का वर्क एक्सपीरियंस था, जिससे बिना अनुभव के जॉब पाना उनके लिए कठिन था।
‘गुरु मंत्र’ : जॉब पाने के टिप्स
1. सिर्फ टेक कंपनियों पर निर्भर न रहें
- अधिकांश छात्र गूगल, माइक्रोसॉफ्ट जैसी टेक दिग्गजों में ही जॉब तलाशते हैं, लेकिन प्रियंका ने इस रूढ़ि को तोड़ा।
- उन्होंने हेल्थकेयर इंडस्ट्री में टेक्निकल इंटर्नशिप चुनी, जहां कंप्यूटर साइंस फील्ड के लिए भी अवसर हैं।
2. वैकल्पिक सेक्टर में मौके तलाशें
- टेक्नोलॉजी स्किल्स अन्य इंडस्ट्रीज में भी जरूरत हैं, जैसे हेल्थकेयर, फाइनेंस, रिटेल आदि।
- स्वास्थ्य क्षेत्र में इंटर्नशिप के बाद उन्हें वहाँ पहली फुल-टाइम जॉब मिली।
3. इंटर्नशिप का पूरा फायदा लें
- कोर्स के दौरान मिली इंटर्नशिप से उन्होंने ‘बिजनेस इंटेलिजेंस एनालिस्ट’ की भूमिका निभाई और मजबूत अनुभव हासिल किया।
- इंटर्नशिप प्रोजेक्ट्स को रिज्यूमे में अच्छे से दर्शाएं।
4. नेटवर्किंग और स्पेशल प्रोजेक्ट्स
- इंटर्नशिप व नौकरी के दौरान नेटवर्किंग से नई नौकरी के द्वार खुल सकते हैं।
- प्रियंका ने यूनियन हॉस्पिटल में अपने प्रोजेक्ट्स को खूब हाईलाइट किया, जिससे उनके प्रोफाइल की वैल्यू बढ़ गई।
- ग्रेजुएशन के बाद 90 दिन में नौकरी ढूंढना जरूरी था (OPT की समय सीमा)।
- समय रहते नई इंडस्ट्री में मौके तलाशें और H-1B स्पॉन्सरशिप कंपनियों को प्राथमिकता दें।
प्रियंका का अनुभवः असल में फायदा कैसे मिला?
- हेल्थकेयर-sector में काम वह आगे Amazon जैसी बड़ी कंपनी में नौकरी पाने में सहायक बना।
- यूनियन हॉस्पिटल की जॉब एवं प्रोजेक्ट्स ने उनका पोर्टफोलियो मजबूत किया।
- 3 साल के वर्क एक्सपीरियंस के बाद, Amazon में H-1B वीज़ा स्पॉन्सरशिप के साथ ‘बिजनेस इंटेलिजेंस एनालिस्ट’ की नौकरी आसानी से मिल गई।
टेक सेक्टर में करियर के लिए अन्य सुझाव
- यूएस जॉब मार्केट की रिसर्च करना – कौन से स्किल्स की डिमांड अधिक है, पता करें।
- प्रोफेशनल नेटवर्किंग – लिंक्डइन आदि से कनेक्टिविटी रखें।
- कस्टमाइज्ड अमेरिकी रिज्यूमे बनाएं।
- जॉब पोस्टिंग वेबसाइट्स, जॉब रिक्रूटिंग एजेंसीज़, और नेटवर्किंग ईवेंट्स का उपयोग करें।
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युवाओं के लिए सुनहरा मौका; रेलवे में 11127 असिस्टेंट लोको पायलट पदों पर भर्ती जल्द
रेलवे में असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) के 11,127 पदों पर भर्ती एक बड़ा अवसर है, जो युवाओं के लिए सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका प्रदान करता है। यह भर्ती CEN No.01/2026 के तहत विभिन्न रेलवे जोनों में होगी।
महत्वपूर्ण तिथियां
ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 15 मई 2026 से शुरू हो चुकी है और 14 जून 2026 रात 12 बजे तक चलेगी। आवेदन केवल आधिकारिक वेबसाइट rrbapply.gov.in पर ही स्वीकार किए जाएंगे। प्रयागराज जैसे क्षेत्रों में भी 600+ पद उपलब्ध हैं।
रिक्तियों का ब्रेकअप
सबसे अधिक पद ईस्ट कोस्ट रेलवे (1625) में हैं, उसके बाद साउथ ईस्टर्न रेलवे (1531) और सेंट्रल रेलवे (1400)। कुल 11,127 पद देशभर के रेलवे जोनों में भरे जाएंगे।
पात्रता और वेतन
चयनित उम्मीदवारों को प्रारंभिक मूल वेतन 19,900 रुपये मिलेगा (लेवल-2)। विस्तृत पात्रता जैसे उम्र सीमा और शैक्षणिक योग्यता आधिकारिक नोटिफिकेशन में देखें। भर्ती प्रक्रिया में CBT, CBAT और दस्तावेज सत्यापन शामिल होंगे।
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क्या अब वर्क फ्रॉम होम से होगा सारा काम? पीएम मोदी ने की वर्क फ्रॉम होम की चर्चा
पीएम मोदी ने वर्क फ्रॉम होम (WFH) को पूर्ण रूप से अनिवार्य नहीं किया, बल्कि मिडिल ईस्ट संकट के बीच ईंधन बचत के लिए कंपनियों से इसे दोबारा अपनाने की अपील की है। यह सलाह वैश्विक आर्थिक दबाव और पेट्रोल-डीजल की बचत पर केंद्रित है।
पीएम मोदी की अपील
10 मई 2026 को हैदराबाद जनसभा में पीएम ने कोविड काल के WFH मॉडल को याद करते हुए कहा कि जहां संभव हो, कंपनियां और कर्मचारी घर से काम करें, ऑनलाइन मीटिंग लें। इससे वाहनों का दबाव कम होगा और तेल आयात पर खर्च बचेगा।
मौजूदा नीतियां
नए लेबर कोड्स 2026 में WFH को IT, सर्विस सेक्टरों में कानूनी मान्यता मिली है, हाइब्रिड मॉडल को बढ़ावा। SEZ में 50% कर्मचारियों को 1 साल तक WFH की अनुमति। फैसला कंपनी-कर्मचारी सहमति पर निर्भर।
चर्चा के कारण
मिडिल ईस्ट तनाव से ईंधन महंगा होने पर अपील वायरल हो गई, लेकिन कोई नया बाध्यकारी नियम नहीं। पहले भी पीएम ने फ्लेक्सिबल वर्किंग को भविष्य बताया था।
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अमेरिका में इंटर्नशिप को लेकर क्या नियम है? समझ लें भारतीय छात्र
अमेरिका में भारतीय छात्र मुख्य रूप से F-1 स्टूडेंट वीजा पर इंटर्नशिप कर सकते हैं, लेकिन अलग वर्क परमिट की जरूरत पड़ती है। नियम CPT, OPT या ऑन-कैंपस वर्क पर आधारित हैं।
F-1 वीजा नियम
F-1 वीजा धारक को इंटर्नशिप के लिए अतिरिक्त पेपरवर्क नहीं चाहिए अगर कोर्स से जुड़ी हो। पहले वर्ष ऑफ-कैंपस इंटर्नशिप प्रतिबंधित है; ऑन-कैंपस 20 घंटे/सप्ताह तक अनुमत।
CPT और OPT
- CPT (Curricular Practical Training): कोर्स का हिस्सा होने पर (पहले वर्ष के बाद), अपडेटेड I-20 और वर्क अथॉराइजेशन (EAD) जरूरी। पेड/अनपेड दोनों।
- OPT (Optional Practical Training): डिग्री के बाद 12 महीने (STEM में 24 महीने अतिरिक्त), EAD कार्ड के साथ।
J-1 वीजा विकल्प
ट्रेनी/इंटर्न के लिए J-1 वीजा लें, जो अलग इंटर्नशिप प्रोग्राम के लिए है। इसमें स्पॉन्सरशिप और इंग्लिश प्रूफ चाहिए।
महत्वपूर्ण शर्तें
| प्रकार | वर्क परमिट | घंटे/सप्ताह | अवधि | ||||
| प्रकार | वर्क परमिट | घंटे/सप्ताह | अवधि | ||||
| ऑन-कैंपस | EAD | 20 (पूर्णकालिक ब्रेक में) | सेमेस्टर भर | ||||
| CPT | EAD + I-20 | पूर्णकालिक | कोर्स अवधि | ||||
| OPT | EAD | 20 (पढ़ाई के दौरान) | 12-36 महीने | ||||
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