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भारतीय शिक्षा व्यवस्था में एक नई ऐतिहासिक शुरुआत, CBSE (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) अब बनेगा “इंटरनेशनल बोर्ड”

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भारतीय शिक्षा व्यवस्था में एक नई ऐतिहासिक शुरुआत की जा रही है—CBSE (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) अब “इंटरनेशनल बोर्ड” बनने जा रहा है।

क्या है निर्णय और बदलाव?

  • शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के अनुसार, CBSE अब एक अंतरराष्ट्रीय मानकों वाला बोर्ड बनेगा, जिसकी “ग्लोबल करिकुलम” 2026-27 से अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए शुरू की जाएगी।
  • विदेशों में CBSE के 240 से भी ज़्यादा स्कूल पहले से सक्रिय हैं, और संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कुवैत, रूस, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, म्यांमार, ईरान, कतर सहित अन्य देशों में CBSE स्कूल चलते हैं।

नया “ग्लोबल करिकुलम” क्या है?

  • यह करिकुलम IB (International Baccalaureate) और Cambridge की तरह अंतरराष्ट्रीय स्तर की पढ़ाई के लिए डिज़ाइन किया गया है, लेकिन भारतीय शिक्षा की शक्ति और वैश्विक दृष्टिकोण दोनों को साथ लेकर चलेगा।
  • इसमें स्किल-बेस्ड (skills-based), प्रोजेक्ट और रिसर्च आधारित लर्निंग, इंटरडिसिप्लिनरी एप्रोच तथा flexible मूल्यांकन प्रणाली शामिल होगी।
  • विदेशी स्कूलों के साथ-साथ भारत के CBSE संबद्ध स्कूल भी इसे अपना सकते हैं।
  • 2010 में पहले CBSE-i इंटरनेशनल करिकुलम की कोशिश हुई थी, लेकिन वो 2017 में बंद कर दिया गया था; नया मॉडल और अधिक मजबूत और बेहतर ट्रेनिंग, डिजिटल, एवं ग्लोबल मानकों के साथ आएगा।

भारतीय छात्रों को क्या फ़ायदा होगा?

  • CBSE इंटरनेशनल करिकुलम को मान्यता मिलने के बाद छात्र विदेशों में पढ़ाई, स्कॉलरशिप, और कैरियर के लिए और ज्यादा सक्षम हो सकेंगे।
  • शिक्षा का स्तर अंतरराष्ट्रीय मापदंडों के अनुरूप होगा, जिससे ग्लोबल यूनिवर्सिटीज़ और जॉब मार्केट में प्रतियोगिता में आसानी होगी।

लागू कब से होगा?

  • CBSE का नया इंटरनेशनल बोर्ड और उसका ग्लोबल करिकुलम 2026-27 से शुरू किए जाने की योजना है।

यह फैसला नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP 2020) के विज़न का हिस्सा है, जिससे भारतीय शिक्षा प्रणाली को वैश्विक स्तर पर और प्रतिस्पर्धी बनाया जा रहा है।

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मीडिया गुरु प्रो (डॉ.) केजी सुरेश पर शोध, राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने अंकित पांडेय को प्रदान की पीएचडी उपाधि

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भोपाल ।]

मीडिया एवं जनसंचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि के तहत डॉ. अंकित पांडेय को विद्या वाचस्पति (पीएचडी) की उपाधि प्रदान की गई। यह उपाधि मध्य प्रदेश के माननीय राज्यपाल मंगूभाई पटेल द्वारा एक गरिमामय समारोह में प्रदान की गई। यह शोध देश के प्रतिष्ठित मीडिया शिक्षाविद् प्रो. (डॉ.) केजी सुरेश के व्यक्तित्व और कृतित्व पर आधारित है, जिसमें उनके तीन दशकों से अधिक के बहुआयामी योगदान का गहन विश्लेषण किया गया है।

इस अवसर पर अभिनेता एवं सांसद रवि किशन तथा राज्यसभा सांसद एवं भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला सहित अनेक गणमान्य व्यक्तित्व उपस्थित रहे।

डॉ. अंकित पांडेय द्वारा किए गए शोध में प्रो. केजी सुरेश के पत्रकारिता, मीडिया शिक्षा, अंतरराष्ट्रीय संवाद और संस्थागत नेतृत्व के विभिन्न आयामों को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है। शोध में उल्लेख किया गया है कि प्रो. सुरेश ने भारत के साथ-साथ पाकिस्तान, अफगानिस्तान, नेपाल और चीन जैसे देशों में सक्रिय संवाददाता के रूप में कार्य करते हुए जमीनी पत्रकारिता को नई दिशा दी। उनकी रिपोर्टिंग केवल समाचार तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसने सामाजिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य को समझने का एक व्यापक दृष्टिकोण भी प्रदान किया।

प्रो. सुरेश ने दूरदर्शन में सलाहकार संपादक के रूप में कार्य करते हुए प्रसारण पत्रकारिता को सुदृढ़ किया। इसके अतिरिक्त, भारतीय जनसंचार संस्थान के महानिदेशक के रूप में उन्होंने संस्थान को ‘डीम्ड विश्वविद्यालय’ का दर्जा दिलाने की दिशा में पहल की और भाषाई पत्रकारिता को बढ़ावा दिया।

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलगुरु के रूप में उन्होंने भोपाल और रीवा में नए परिसरों की स्थापना की तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति को प्रभावी रूप से लागू किया। उन्होंने नई पीढ़ी को मूल्य-आधारित पत्रकारिता की दिशा में निरंतर मार्गदर्शन प्रदान किया।

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डॉ. अंकित पांडेय ने अपने शोध को केवल एक शैक्षणिक उपलब्धि न मानते हुए इसे गुरु–शिष्य परंपरा का जीवंत उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि यह शोध उनके लिए अपने गुरु के प्रति सम्मान, श्रद्धा और समर्पण की अभिव्यक्ति है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रो. केजी सुरेश के विचार, कार्यशैली और नैतिक मूल्यों को समझना उनके लिए एक सतत सीखने की प्रक्रिया रही है, जिसे उन्होंने अपने शोध के माध्यम से अभिव्यक्त करने का प्रयास किया है।

समारोह के दौरान डॉ. पांडेय ने कहा कि माननीय राज्यपाल मंगूभाई पटेल, रवि किशन, राजीव शुक्ला तथा मध्य प्रदेश की राज्य मंत्री कृष्णा गौर जैसे प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों के हाथों यह उपाधि प्राप्त करना उनके लिए आशीर्वाद और प्रेरणा का स्रोत है।

यह उपलब्धि न केवल डॉ. अंकित पांडेय के व्यक्तिगत परिश्रम और समर्पण का परिणाम है, बल्कि मीडिया शिक्षा और शोध के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान के रूप में भी स्थापित हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के शोध कार्य आने वाले समय में पत्रकारिता के विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होंगे तथा गुरु–शिष्य परंपरा को और सुदृढ़ करेंगे।

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उत्तर प्रदेश -झारखंड में भीषण गर्मी का कहर, स्कूलों की टाइमिंग बदली

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उत्तर प्रदेश और झारखंड में भीषण गर्मी और हीटवेव के चलते राज्य सरकारों ने शीतकालीन/सामान्य टाइमिंग के बजाय स्कूलों की समय‑सारणी बदल दी है, ताकि बच्चे दोपहर की झुलसाती धूप और लू से बच सकें।


उत्तर प्रदेश में क्या आदेश है

  • कई जिलों में स्कूलों की दोपहर की गर्मी से बचाने के लिए समय को सुबह की ओर शिफ्ट किया गया है, जैसे कक्षाएँ अब सुबह जल्दी शुरू और दोपहर से पहले खत्म करवाने के निर्देश।
  • जहाँ तापमान अत्यधिक रहता है, वहाँ स्कूल दिनचर्या छोटी और हल्की रखने, लंबे ब्रेक और छत्र/पंखे/पानी की व्यवस्था को बेहतर करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

झारखंड में नई स्कूल टाइमिंग

  • झारखंड सरकार के निर्देश पर रांची और अन्य जिलों के सभी प्रकार के स्कूलों (सरकारी, गैर‑सरकारी, निजी सहित) की समय‑सारणी बदली गई है।
  • नई टाइमिंग का मुख्य ढांचा (लगभग):
    • KG से कक्षा 8 तक: सुबह 7:00 बजे से 11:30 बजे तक कक्षा।
    • कक्षा 9 से 12 तक: सुबह 7:00 बजे से 12:00 बजे तक कक्षा।

शिक्षकों और स्टाफ के लिए आदेश

  • झारखंड में सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को सुबह 7:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक स्कूल में उपस्थित रहकर गैर‑शैक्षणिक कार्य (बैठक, रिकॉर्ड, बोर्ड पर काम आदि) करने का निर्देश दिया गया है।
  • यह आदेश 21 अप्रैल 2026 से प्रभावी है और भीषण गर्मी से बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है।

अभिभावकों के लिए ज़रूरी बातें

  • अपने ज़िले/शहर के शिक्षा विभाग या विद्यालय वाट्स‑एप ग्रुप से स्थानीय ऑर्डर ज़रूर चेक करें, क्योंकि कुछ ज़िलों में अलग टाइमिंग या अस्थायी छुट्टी भी हो सकती है।
  • बच्चों को हल्के‑कपड़े, टोपी, पानी की बोतल और थोड़ा खाना ज़रूर दें, ताकि गर्मी और लू से कम से कम नुकसान हो।
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भिकनगांव–बिंजलवाड़ा उपवहन परियोजना से बदलेगी खेती की तस्वीर, 50 हजार हेक्टेयर में सिंचाई का लक्ष्य

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खरगोन (मध्यप्रदेश)।

नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा संचालित भिकनगांव–बिंजलवाड़ा सूक्ष्म सिंचाई परियोजना जिले में आधुनिक कृषि का नया अध्याय लिख रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत करीब 50,164 हेक्टेयर क्षेत्र और 129 गांवों को सिंचाई सुविधा से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना को पांच पंप हाउस क्षेत्रों में विभाजित कर चरणबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है।

परियोजना के अंतर्गत पंप हाउस क्रमांक-1 (दौड़वा लोहारी) क्षेत्र में पिछले वर्ष मार्च-अप्रैल से सिंचाई शुरू हो चुकी है। कुल 6995 हेक्टेयर क्षेत्र में से अब तक 4663 हेक्टेयर भूमि सिंचित हो रही है और 15 मई तक पूरे क्षेत्र को कवर करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

पंप हाउस क्रमांक-2 (बावड़िया) क्षेत्र में 1 अप्रैल से सिंचाई शुरू की गई है। यहां 2924 हेक्टेयर क्षेत्र में से फिलहाल हीरापुर, बिंजलवाड़ा और दशोड़ा तालाबों के माध्यम से लगभग 1200 हेक्टेयर क्षेत्र में पानी पहुंचाया जा रहा है। शेष क्षेत्र को भी 15 मई तक सिंचित करने की योजना है।

पंप हाउस क्रमांक-3 (भगवानपुरा) क्षेत्र में नवंबर 2025 से कार्य शुरू हुआ था। वर्तमान में आखापुरा तालाब, सांगवी, केदवा, साइखेड़ी और अमनखेड़ी नालों के जरिए 10595 हेक्टेयर में से 7870 हेक्टेयर भूमि सिंचित हो रही है। इसे 30 मई तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है।

पंप हाउस क्रमांक-4 (खारवी) क्षेत्र, जो 16328 हेक्टेयर में फैला है, में पाइपलाइन बिछाने का कार्य अंतिम चरण में है। क्षेत्रीय सीमांकन में बदलाव के चलते कुछ देरी हुई, लेकिन अब 30 जून तक इस क्षेत्र में सिंचाई शुरू करने की तैयारी है।

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पंप हाउस क्रमांक-5 (बढ़िया) क्षेत्र में मार्च से कार्य शुरू किया गया है। सुल्तानपुरा और शिवना नदियों सहित कई नालों और तालाबों में पानी छोड़कर 13322 हेक्टेयर में से 8108 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचित किया जा रहा है। इसे भी 30 मई तक पूर्ण करने का लक्ष्य है।

परियोजना के प्रमुख बिंदुओं में 30 जून तक संपूर्ण कार्य पूर्ण करना, पाइपलाइन सुरक्षा के लिए प्राइमरी फिल्ट्रेशन सिस्टम लगाना और गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाना शामिल है।

प्राधिकरण ने किसानों से अपील की है कि वे निर्धारित नियमों का पालन करें। प्रत्येक 20 हेक्टेयर पर स्थापित OMS पेटी में चार आउटलेट दिए गए हैं, जिनका उपयोग बारी-बारी से किया जाना चाहिए। एक समय में केवल दो आउटलेट संचालित करने की सलाह दी गई है, ताकि सभी किसानों को पर्याप्त पानी मिल सके।

यह परियोजना विशेष रूप से ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली के लिए बनाई गई है, जिससे पानी की बचत के साथ उत्पादन में वृद्धि सुनिश्चित हो सके। किसानों से अनुरोध किया गया है कि वे इन आधुनिक तकनीकों को अपनाएं और अन्य किसानों को भी इसके लिए प्रेरित करें।

नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की यह पहल न केवल सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करेगी, बल्कि क्षेत्र में कृषि उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाएगी।क्षेत्रों में संचालित योजना से 52 गांवों को लाभ, जून तक 100% सिंचाई कवरेज का लक्ष्य

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